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प्रदोष व्रत (कृष्ण पक्ष)

आज हो रहा है!

इस इवेंट के बारे में

प्रदोष व्रत (कृष्ण पक्ष)

प्रदोष व्रत प्रत्येक चंद्र मास के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है, जो भगवान शिव की आराधना को समर्पित है। श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में आने वाले इस व्रत को 'कृष्ण प्रदोष व्रत' कहा जाता है। संध्या काल में सूर्यास्त के समय को 'प्रदोष काल' कहा जाता है, जो शिव पूजन के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। भक्त दिन भर व्रत रखकर शाम को शिव मंदिर जाते हैं और जल, दूध, बेलपत्र से शिवलिंग का अभिषेक करते हुए ॐ नमः शिवाय का जाप करते हैं। चूंकि यह प्रदोष पवित्र श्रावण महीने में पड़ता है, जो पहले से ही शिव जी का प्रिय महीना है, इसलिए सावन के व्रतियों के लिए इसका महत्व और बढ़ जाता है।

इवेंट तारीखें

अगस्त 2026

तारीखदिनस्थितिकैलेंडर देखें
9 अगस्त 2026रविवारआज

Notes

High confidence. Krishna Pradosh Vrat during Shravana falls on the trayodashi tithi preceding Sawan Shivratri, corresponding to August 9, 2026.

Today's Events

विश्व आदिवासी दिवस

विश्व आदिवासी दिवस

प्रतिवर्ष 9 अगस्त को दुनियाभर में 'विश्व आदिवासी दिवस' मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1994 में मूलनिवासी व आदिवासी समुदायों के योगदान को सराहने और उनकी समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए इस दिवस की शुरुआत की थी। यह तारीख 1982 में जेनेवा में आदिवासी आबादी पर बने संयुक्त राष्ट्र कार्य समूह की पहली बैठक की याद में चुनी गई थी। हर साल यह दिवस आदिवासी अधिकारों, संस्कृति, भाषा संरक्षण या पर्यावरण संरक्षण से जुड़े किसी विशेष विषय (थीम) पर आधारित होता है। भारत में इस दिन देश के आदिवासी समुदायों की समृद्ध संस्कृति, जल-जंगल-जमीन के अधिकार, शिक्षा और उनकी जनजातीय भाषाओं के संरक्षण पर चर्चाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
प्रदोष व्रत (कृष्ण पक्ष)

प्रदोष व्रत (कृष्ण पक्ष)

प्रदोष व्रत प्रत्येक चंद्र मास के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है, जो भगवान शिव की आराधना को समर्पित है। श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में आने वाले इस व्रत को 'कृष्ण प्रदोष व्रत' कहा जाता है। संध्या काल में सूर्यास्त के समय को 'प्रदोष काल' कहा जाता है, जो शिव पूजन के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। भक्त दिन भर व्रत रखकर शाम को शिव मंदिर जाते हैं और जल, दूध, बेलपत्र से शिवलिंग का अभिषेक करते हुए ॐ नमः शिवाय का जाप करते हैं। चूंकि यह प्रदोष पवित्र श्रावण महीने में पड़ता है, जो पहले से ही शिव जी का प्रिय महीना है, इसलिए सावन के व्रतियों के लिए इसका महत्व और बढ़ जाता है।

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